उत्तराखंड में हरित परिवहन (Green Mobility) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ई-वाहन नीति (Electric Vehicle Policy) पर काम कर रही है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को संबंधित विभागों के साथ बैठक कर नीति के प्रारूप की समीक्षा की और अधिकारियों को उपभोक्ताओं, निर्माताओं और ई-वाहन संचालकों के लिए बेहतर प्रोत्साहन योजना बनाने के निर्देश दिए।
नीति का उद्देश्य: ग्रीन ट्रांसपोर्ट का निर्माण
मुख्य सचिव ने कहा कि नीति का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। उन्होंने सुझाव दिया कि:
- ई-वाहन अपनाने वालों को वित्तीय सहायता दी जाए,
- निर्माण इकाइयों को सब्सिडी और टैक्स छूट मिले,
- और संचालकों को इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग प्रदान किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने त्वरित निगरानी तंत्र और नीति क्रियान्वयन की प्रभावी प्रणाली स्थापित करने को भी जरूरी बताया।
क्या होगी नीति में खास बातें?
सचिव विनय शंकर पांडेय ने बताया कि प्रस्तावित नीति में उपभोक्ता से लेकर निर्माता तक हर पक्ष के लिए विशेष प्रावधान होंगे। इनमें शामिल हैं:
- टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, फोर-व्हीलर और ई-बस के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन।
- कार्बन क्रेडिट बेनिफिट देने का भी प्रस्ताव।
- ई-वाहन चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना को प्रोत्साहन।
उत्तराखंड में ई-वाहनों की स्थिति
भारत में कुल 34 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से करीब 61.65 लाख इलेक्ट्रिक वाहन हैं। वहीं उत्तराखंड में कुल 42,15,496 वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से 84,614 ई-वाहन हैं। राज्य सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या कई गुना बढ़ाई जाए।
नीति से क्या लाभ होंगे?
- वातावरण संरक्षण: वायु प्रदूषण में भारी कमी आएगी।
- रोजगार के अवसर: इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और सर्विस सेक्टर में नौकरियों की संभावनाएं।
- आर्थिक बचत: उपभोक्ताओं को ईंधन पर होने वाला खर्च बचेगा।
- नई तकनीकों को बढ़ावा: EV टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बल मिलेगा।