उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के परिणाम आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी भाजपा ने अब सभी जिलों में जिला पंचायतों पर नियंत्रण बनाने के लिए कमर कस ली है। पार्टी न सिर्फ अपने समर्थित विजेता सदस्यों को एकजुट कर रही है, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवारों को भी अपने पाले में लाने के लिए भरपूर प्रयास कर रही है।
उत्तरकाशी में भाजपा की सक्रियता
रुद्रप्रयाग के बाद अब उत्तरकाशी में भी भाजपा की सक्रियता बढ़ गई है। सोमवार को उत्तरकाशी के 20 जिला पंचायत सदस्यों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से देहरादून स्थित उनके आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात को भाजपा की रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले रुद्रप्रयाग के प्रतिनिधियों ने भी सीएम से मुलाकात कर संकेत दे दिए थे कि भाजपा समर्थन जुटाने की दिशा में संगठित प्रयास कर रही है।
आरक्षण प्रक्रिया और अध्यक्ष पद की तैयारी
जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण प्रक्रिया भी समानांतर रूप से आगे बढ़ रही है। इसके बीच भाजपा की रणनीति साफ है—जिन जिलों में पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीयों को अपने पक्ष में लाकर बोर्ड गठन की संभावना मजबूत करना।
रणनीतिक बैठकें और संगठन की भागीदारी
देहरादून सहित विभिन्न जिलों में भाजपा द्वारा विशेष रणनीति तैयार की जा रही है। मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को जिलों की जिम्मेदारी दी गई है, जो न केवल जिला पंचायत सदस्यों से संवाद कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय समीकरणों के आधार पर समर्थन पक्का करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री आवास पर हो रही बैठकों में यह रणनीति साफ तौर पर नजर आ रही है।
पिछली बार 10 जिलों में बोर्ड, इस बार लक्ष्य 12 का
पिछले जिला पंचायत चुनावों में भाजपा ने 12 में से 10 जिलों में अपना बोर्ड बनाया था। इस बार पार्टी का लक्ष्य सभी 12 जिलों में बहुमत हासिल कर बोर्ड गठन करना है। इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता चुनाव परिणामों के बाद की स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं और शतरंज की हर चाल को सोच-समझकर चला जा रहा है।