भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र का हाल: 11 साल में सिर्फ 35 दिन चली कार्यवाही

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में एक बार फिर विधानसभा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। 19 अगस्त 2025 को शुरू हुआ यह सत्र केवल दो दिन में समाप्त हो गया, जिसमें सदन की कार्यवाही सिर्फ 2 घंटे 40 मिनट ही चल सकी। इसके साथ ही सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सरकार ने 5315 करोड़ का अनुपूरक बजट और आठ विधेयक पारित कर लिए, लेकिन किसी मुद्दे पर गंभीर चर्चा नहीं हो सकी।

भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र
भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र

इतिहास में पहली बार बिना किसी चर्चा के सत्र समाप्त

उत्तराखंड विधानसभा के इतिहास में यह पहला मौका था जब इतना खर्च करने के बावजूद सत्र में न कोई प्रश्नकाल, न नियम-58 के तहत चर्चा, और न ही नियम-300 व 53 के तहत कोई कार्यवाही हो सकी। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

भराड़ीसैंण: सपनों की राजधानी, लेकिन सत्र चलाने में नाकाम

वर्ष 2014 में जब पहली बार भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में टेंट में विधानसभा सत्र हुआ, तब इसे पर्वतीय जनता के सपनों की राजधानी कहा गया। पशुपालन विभाग की 47 एकड़ भूमि पर विधानसभा भवन का शिलान्यास हुआ और उम्मीदें जगीं कि पहाड़ की आवाज़ अब संसद में गूंजेगी। लेकिन 11 वर्षों में केवल 10 सत्र हो सके, जो कुल सिर्फ 35 दिन चले।

11 वर्षों में कब-कब और कितने दिन चले सत्र

सत्र की तिथि अवधि (दिनों में)
09 जून 2014 03 दिन
02 नवंबर 2015 02 दिन
17 नवंबर 2016 02 दिन
07 दिसंबर 2017 02 दिन
20 मार्च 2018 06 दिन
03 मार्च 2020 05 दिन
01 मार्च 2021 06 दिन
13 मार्च 2023 04 दिन
21 अगस्त 2024 03 दिन
19 अगस्त 2025 02 दिन
कुल 35 दिन

सत्ता बदली, नज़रिया नहीं बदला

भराड़ीसैंण में अब तक:

  • कांग्रेस सरकार में 3 सत्र हुए।
  • भाजपा सरकार में 6 सत्र हुए।
  • सबसे लंबा सत्र त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में चला – कुल 19 दिन

सत्रों की पटकथा अब एक सी होती जा रही है – सरकार सत्र बुलाती है, विपक्ष हंगामा करता है, और फिर सत्र बिना चर्चा के समाप्त हो जाता है।

क्यों उठ रहे हैं सवाल?

  • करोड़ों खर्च होने के बावजूद कोई चर्चा नहीं।
  • आपदा, कानून व्यवस्था, रोजगार, पलायन जैसे अहम मुद्दे पूरी तरह गायब।
  • लोकतंत्र की आत्मा – सवाल-जवाब और बहस – निष्क्रिय।

 

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