उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए हेली सेवाएं एक अहम साधन बन गई हैं। विशेष रूप से केदारनाथ जैसे तीर्थ स्थलों के लिए हेलीकॉप्टर यात्राएं श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक विकल्प हैं। लेकिन हाल के वर्षों में हेली सेवा कंपनियों की लापरवाहियां और नियमों की अनदेखी से यह सुविधा अब खतरे में बदलती जा रही है।

ताजा मामला: अनुमति रद्द होने के बाद भी भरी उड़ान
बीते सोमवार को देहरादून से केदारनाथ धाम के लिए उड़ान भरने की अनुमति हेरिटेज एविएशन ने यूकाडा से मांगी थी। दोपहर दो बजे तक इसे सीमित अनुमति भी मिली, लेकिन मौसम खराब होने के कारण यूकाडा ने अनुमति को निरस्त कर दिया। इसके बावजूद कंपनी ने नियमों की अनदेखी करते हुए उड़ान भर दी, जिससे यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई।
इस मामले को उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए। साथ ही हेरिटेज एविएशन के हेलीकॉप्टर संचालन पर यूकाडा के सभी हेलीपैड से अस्थायी रूप से पूर्ण रोक लगा दी गई है।
रफ्तार पर लापरवाही: पांच हादसों में 13 लोगों की मौत
उत्तराखंड में इस वर्ष अब तक पांच हेलीकॉप्टर हादसे हो चुके हैं, जिनमें 13 यात्रियों की जान जा चुकी है। इन घटनाओं के बावजूद हेली कंपनियां लापरवाही और नियम उल्लंघन से बाज नहीं आ रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि सुरक्षा से ज्यादा कंपनियों के लिए मुनाफा मायने रखता है।
हेलीकॉप्टर सेवाओं में बढ़ती मनमानी: क्यों हो रही है अनदेखी?
उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पर्वतीय राज्य में हवाई सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात कुछ और ही बयां करते हैं:
- खराब मौसम में उड़ान भरना
- यूकाडा की निर्देशों की अवहेलना
- तकनीकी जांच और रखरखाव में लापरवाही
- पायलटों पर दबाव में उड़ान भरवाना
यह सब दर्शाता है कि हेली सेवा कंपनियों को न तो पर्यटकों की सुरक्षा की चिंता है और न ही नियमों की परवाह।
यूकाडा की भूमिका और आगामी कदम
यूकाडा ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाया है। जांच पूरी होने तक हेरिटेज एविएशन के सभी हेलीकॉप्टर संचालन पर रोक लगा दी गई है। साथ ही यह संकेत दिया गया है कि यदि भविष्य में कोई भी हेली सेवा कंपनी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करती पाई गई, तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।