नैनीताल जिले में बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देना है। पुराने मीटरों को हटाकर नए डिजिटल स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। जिले में कुल 1.88 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं, जिनमें से अकेले हल्द्वानी नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 1.25 लाख मीटर लगने हैं। अब तक 30,000 से अधिक मीटर बदले जा चुके हैं।

दोगुना बिल और उपभोक्ताओं की नाराजगी
हालांकि, स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं को राहत मिलने के बजाय और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों से शिकायतें आ रही हैं कि मीटर बदलने के बाद बिजली के बिल दोगुने या उससे भी ज्यादा आ रहे हैं। खासतौर पर उन उपभोक्ताओं की नाराजगी ज्यादा है जिनका मासिक खपत लगभग समान रही है, फिर भी नए बिलों में भारी वृद्धि देखी जा रही है।
लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
बिल की बढ़ती रकम ने आम जनता की जेब पर असर डाला है। कई उपभोक्ता ऊर्जा निगम कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। कुछ ने तो सोशल मीडिया और जन प्रतिनिधियों के माध्यम से भी अपनी आवाज उठाई है। हल्द्वानी और उसके आस-पास के क्षेत्रों में लोगों की नाराजगी अब विरोध प्रदर्शन की शक्ल भी ले सकती है।
ऊर्जा निगम का दावा: “सुधार और जांच जारी”
इस मुद्दे पर ऊर्जा निगम का कहना है कि हर शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जहां भी गलत बिलिंग हुई है, वहां सुधार कर उपभोक्ताओं को राहत दी जाएगी। इसके साथ ही निगम स्मार्ट मीटर से जुड़े भ्रम और गलतफहमियों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रहा है।
क्या है स्मार्ट मीटर का फायदा?
सैद्धांतिक रूप से स्मार्ट मीटर के कई फायदे हैं:
- वास्तविक समय में खपत की जानकारी
- मीटर रीडिंग में पारदर्शिता
- बिजली चोरी पर लगाम
- ऑनलाइन बिलिंग और भुगतान की सुविधा
लेकिन जब इन तकनीकों का क्रियान्वयन गड़बड़ी के साथ होता है, तो उपभोक्ताओं का विश्वास डगमगाने लगता है।