एक लंबे इंतजार के बाद प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण एक बार फिर राजनीतिक हलचलों से गुलजार हो गई है। मंगलवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत पूरी सरकार और विपक्ष के नेता भराड़ीसैंण पहुंच चुके हैं। सत्र की शुरुआत से पहले ही पूरे क्षेत्र में एक नई ऊर्जा और उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है।

टूटी सड़कों से लेकर टूटी उम्मीदों तक
गैरसैंण पहुंचने का सफर इस बार भी आसान नहीं रहा। पहाड़ों में लगातार बारिश, भू-स्खलन और सड़कों की खस्ता हालत ने सभी को जमीनी हकीकत से रूबरू कराया। लेकिन इस कठिन यात्रा ने शायद सरकार को भी वह दर्द महसूस करवाया, जिससे आज पहाड़ की जनता रोज जूझ रही है।
विपक्ष की हुंकार और जनता की पुकार
विपक्ष ने भी इस बार गैरसैंण में डेरा डाल दिया है और सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की तैयारी में है। जनता की उम्मीदों, टूटी योजनाओं और अधूरे वादों का हिसाब मांगने के लिए विपक्ष एकजुट नजर आ रहा है। वहीं सरकार ने भी इस सत्र को ऐतिहासिक बनाने के संकेत दिए हैं।
विकास की उम्मीदें फिर जवान
गैरसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पहाड़ की आकांक्षाओं का केंद्र भी है। यहां से उठी आवाज़ें पूरे राज्य की दिशा तय करती हैं। इस बार की आपदाओं और चुनौतियों के बीच जब सरकार खुद मलबों को पार कर यहां पहुंची है, तो उम्मीद की जा रही है कि विकास की योजनाएं भी जमीन पर उतरेंगी।
पहाड़ चढ़ने का जुनून और जिम्मेदारी
सरकार की टीम ने जिस तरह से कठिनाईयों के बावजूद गैरसैंण का रुख किया है, उससे यह संदेश जरूर गया है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। अब देखना यह है कि यह जुनून केवल यात्रा तक सीमित रहता है या पहाड़ की समस्याओं को दूर करने के लिए ठोस कदमों में भी बदलेगा।