उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी पर बनी अस्थायी झील का जलस्तर एक बार फिर से चिंता का कारण बन गया है। सोमवार को हुई मूसलधार बारिश के बाद झील में पानी तेजी से बढ़ा है, जिससे क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है।

झील बनने की पृष्ठभूमि
- 5 अगस्त को तिलगाड़ में बादल फटने से भारी मलबा और टूटे पेड़ भागीरथी नदी में आ गए थे।
- इसके कारण झोल बन गया और नदी की धारा अवरोधित होकर लगभग 750 मीटर लंबी झील बन गई।
- गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब 300 मीटर हिस्सा झील के पानी में समा गया।
झील का जलस्तर फिर बढ़ा
- सोमवार को झील का जलस्तर कुछ घटा था जब SDRF और UJVNL की टीमों ने अवरोधक पेड़ हटाए।
- लेकिन शाम होते-होते बारिश के कारण भागीरथी और झील का जलस्तर फिर तेजी से बढ़ने लगा।
प्रशासन और सेना अलर्ट पर
- हर्षिल में सेना और पुलिस ने नदी किनारे बसे लोगों को अलर्ट किया।
- घर, होटल और रिसॉर्ट्स में ठहरे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया।
- दो NDRF बोट को जल निकासी कार्य में मदद के लिए तैनात किया गया है।
जल निकासी का प्रयास जारी
- उत्तराखंड जल विद्युत निगम और सिंचाई विभाग की करीब 30 सदस्यीय टीम झील से नियंत्रित जल निकासी में लगी है।
- मंगलवार को झील को मैन्युअली पंचर करने का प्रयास भी जारी रहा।
डीएम ने दिया सहयोग, बढ़ाया हौसला
- जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्वयं现场 पर जाकर कार्मिकों का हौसला बढ़ाया और बचाव कार्यों में मदद की।
- उन्होंने कहा,
“प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और हर संभावित खतरे से निपटने को तैयार है।”
निगरानी और आपदा प्रबंधन पर फोकस
धराली सैलाब की भयावहता को देखते हुए
- नदी की धारा, जलस्तर और आसपास के भू-क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है।
- सेना, NDRF, SDRF और प्रशासनिक इकाइयां मिलकर आपदा प्रबंधन में जुटी हुई हैं।