उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के पहले चरण में 68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसमें महिलाओं ने 73% और पुरुषों ने 63% मतदान कर लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया। खास बात यह रही कि इस बार न केवल स्थानीय लोग, बल्कि प्रवासी मतदाता भी भारी संख्या में अपने गांव लौटे और वोट देकर यह साफ कर दिया कि “मेरा गांव, मेरा वोट” की भावना अब सिर्फ नारा नहीं रही, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।

पहले चरण में मतदान की झलक
पहले चरण के अंतर्गत नारायणबगड़, थराली और देवाल विकासखंडों में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। वहीं रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि, जखोली और ऊखीमठ विकासखंडों में 459 मतदान केंद्रों पर वोटिंग हुई। यहां 280 ग्राम प्रधान, 103 क्षेत्र पंचायत सदस्य, और 18 जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए मतदान हुआ।
वोटिंग का उत्साह ऐसा था कि कई बूथों पर देर रात तक कतारें लगी रहीं। कुछ स्थानों पर प्राकृतिक बाधाएं भी मतदान के जोश को नहीं रोक सकीं। कोट गांव में प्रवासी मतदाता उफनते गदेरे को पार कर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। गांव के युवाओं ने बुजुर्गों और महिलाओं को गदेरे के पार पहुंचाया, जो लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रवासी वोट: ग्राम से जिला तक असर
दिल्ली, देहरादून, हरिद्वार, चंडीगढ़, नोएडा, जयपुर जैसे शहरों से प्रवासी मतदाता ट्रैवलर, निजी वाहन और साझा टैक्सियों के जरिए अपने गांव पहुंचे। ज्यादातर प्रवासी ग्राम प्रधान पद को लेकर बेहद सजग थे, लेकिन उनका वोट सिर्फ ग्राम प्रधान तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने क्षेत्र और जिला पंचायत के समीकरणों को भी प्रभावित किया है।
गांव के मतदाताओं के मुताबिक, प्रवासी वोटरों का प्रत्याशियों से व्यक्तिगत संबंध होता है, और यही संबंध चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। स्थानीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर जागरूक प्रवासियों ने बताया कि वे सिर्फ नाम के लिए नहीं, बल्कि गांव की विकास योजनाओं में भागीदार बनने के लिए वोट देने आए हैं।
प्रवासी मतदाताओं का अनुभव
प्रवासी मतदाता नीरज, विक्रम, रोहन और अर्जुन सिंह ने बताया कि वे दिल्ली, गुड़गांव और हरिद्वार से विशेष रूप से वोट डालने आए हैं। उन्होंने कहा कि उनके गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं सीमित हैं, और वे बदलाव की उम्मीद में मतदान करने पहुंचे हैं। चंडीगढ़ से आए 30 से अधिक प्रवासियों ने बताया कि ग्राम प्रधान पद के लिए मतदान उनकी प्राथमिकता रही, क्योंकि वे गांव की सरकार को जवाबदेह और विकासोन्मुख बनाना चाहते हैं।