उत्तराखंड की पावन भूमि आज भगवान शिव के जयकारों से गूंज रही है, क्योंकि आज सावन का पहला सोमवार है — एक ऐसा दिन जो शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर देवभूमि के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है, विशेष रूप से गढ़वाल मंडल का कमलेश्वर महादेव मंदिर, जो इस दिन आस्था और भक्ति का केंद्र बन गया है।
यह प्राचीन शिव मंदिर पंचमहेश्वर पीठों में से एक माना जाता है और इसे “सिद्धपीठ” भी कहा जाता है क्योंकि यहां की गई पूजा से साधकों को सिद्धि प्राप्त होने की मान्यता है।

कमलेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता:
श्रीनगर स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि पौराणिक मान्यताओं से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि इसी स्थल पर भगवान राम ने रावण वध के बाद ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए 108 कमल पुष्प अर्पित कर रुद्राभिषेक किया था।
पूजा विधि और सावन में विशेष आयोजन:
सावन माह के हर सोमवार को यहां पारंपरिक विधि से पूजा की जाती है, जिसमें रुद्राभिषेक, पंचामृत स्नान, गंगाजल से अभिषेक और बेलपत्र अर्पण शामिल हैं। भक्तजन मंत्रोच्चारण के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं और महाआरती में शामिल होकर पुण्य अर्जित करते हैं।
मंदिर के महंत 108 आशुतोष पुरी बताते हैं कि यदि कोई श्रद्धालु निष्काम भाव से भगवान शिव का पूजन करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे जीवन में सफलता व समृद्धि मिलती है।
आध्यात्मिक ऊर्जा और मोक्ष का मार्ग:
कमलेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र है, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी है। यहां का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है, जो उन्हें जीवन के उच्चतर उद्देश्य की ओर प्रेरित करता है।