पोक्सो आरोपी से जेल में मारपीट, नैनीताल हाईकोर्ट का सख्त रुख

उत्तराखंड के सितारगंज जेल में पोक्सो (POCSO) के आरोपी एक बंदी के साथ की गई मारपीट के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सुनाया।

पोक्सो
पोक्सो

क्या है मामला?

यह मामला एक याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष लाया गया था। डीएलएसए (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण), ऊधमसिंह नगर के सचिव द्वारा दर्ज की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, पोक्सो के आरोपी सुभान नामक कैदी के साथ सितारगंज जेल में मारपीट की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

इन पर हुई कार्रवाई

कोर्ट के 15 जुलाई 2025 के आदेश के अनुसार:

  • डिप्टी जेलर नवीन चौहान
  • कांस्टेबल राम सिंह कपकोटी

को निलंबित कर दिया गया है। इन दोनों पर आरोपी कैदी के साथ बर्बर मारपीट का आरोप है।

कोर्ट का निर्देश

  • जेल अधीक्षक को आदेश दिया गया है कि वह उन अन्य जेल अधिकारियों के नाम कोर्ट में पेश करें, जो DLSA सचिव द्वारा कैदी से बातचीत के समय मौजूद थे।
  • अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कारागार) को निर्देश दिया गया है कि वे इस आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें।
  • घटना से संबंधित रिपोर्ट और फोटो को रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल के पास सुरक्षित रखने का भी निर्देश कोर्ट ने दिया है।

मानवाधिकारों की रक्षा की ओर न्यायपालिका का संदेश

यह मामला न केवल जेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि न्यायपालिका द्वारा कैदियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए उठाया गया एक अहम कदम भी है। पोक्सो जैसे गंभीर आरोपों में बंद कैदी के साथ इस तरह की घटना न केवल कानून की भावना के विरुद्ध है, बल्कि न्याय प्रणाली की मूल भावना को भी आघात पहुंचाती है।

 

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