उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में 5 अगस्त को आए भयानक बादल फटने से धराली बाजार, हर्षिल और आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई है। अचानक आई बाढ़ और मलबे की तेज़ लहरों ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे कई घर, दुकानें और महत्वपूर्ण मंदिर बह गए। इस प्राकृतिक आपदा में चार लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 70 लोग अभी भी लापता हैं।
धराली के ऊपर खीरगंगा नदी में अचानक आई इस तेज़ बाढ़ ने कल्प केदार मंदिर समेत पूरे बाजार को मलबे के साथ बहा दिया। प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं, लेकिन भारी बारिश और सड़कों के धंसने से कार्यों में काफी कठिनाई आ रही है।

मुख्यमंत्री का आपदा प्रभावित इलाकों का निरीक्षण
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहस्त्रधारा हेलीपैड से धराली, हर्षिल और आसपास के प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए रवाना हुए। उन्होंने राहत कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और प्रभावितों से मुलाकात कर मदद का आश्वासन दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने किया फोन पर सीएम से संपर्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत कर हालात की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की तरफ से हर संभव सहायता का भरोसा दिया। सीएम धामी ने बताया कि राज्य सरकार राहत कार्यों में पूरी तत्परता से जुटी है।
आपदा की गंभीरता और प्रभावित इलाकों की स्थिति
- यमुनोत्री घाटी में बारिश का कहर: लगातार तीसरे दिन हो रही बारिश के कारण यमुना नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर खतरनाक सीमा पर पहुंच गया है।
- सड़कों का बंद होना: गंगोत्री हाईवे पर कई स्थानों पर मलबा गिरने और सड़क धंसने से आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
- राहत टीमों की फंसी: जिला प्रशासन की टीमें भटवाड़ी में फंसी हुई हैं, जिन्हें बचाने के प्रयास जारी हैं।
- राहत शिविर स्थापित: हर्षिल में राहत शिविर स्थापित कर प्रभावितों को प्राथमिक सहायता दी जा रही है।
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों की चेतावनी
आईआईटी रुड़की के हाइड्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर अंकित अग्रवाल ने बताया कि इस बार की आपदा का पैटर्न 2013 के केदारनाथ जलप्रलय से मिलता-जुलता है। भूमध्य सागर से उठे पश्चिमी विक्षोभ के हिमालय से टकराने के कारण बादल फटना और अतिवृष्टि की घटनाएं बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से ये घटनाएं अधिक बार और तीव्रता से हो रही हैं।
प्रशासन की तत्परता और भविष्य की चुनौतियां
उत्तरकाशी जिला प्रशासन ने नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। सड़क मार्ग को खोलने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं। साथ ही सभी सुरक्षा और राहत एजेंसियां मिलकर प्रभावितों को त्वरित मदद पहुंचा रही हैं।
लेकिन लगातार बढ़ती बारिश और भू-आकृतिक संवेदनशीलता के कारण राहत कार्यों में बाधाएं आ रही हैं। ऐसे में सरकार को आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों का सहारा लेकर दीर्घकालीन रणनीति बनानी होगी ताकि भविष्य में नुकसान को कम किया जा सके।