धराली में खामोशी और खौफ का सन्नाटा

उत्तरकाशी का धराली कस्बा, जो कभी चारधाम यात्रियों और पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार रहता था, आज सन्नाटे और खौफ के साए में जी रहा है।
5 अगस्त 2025 को आए भीषण सैलाब ने यहां की रफ्तार थाम दी। अब यहां सिर्फ भागीरथी और खीरगंगा नदियों का उफान सुनाई देता है—एक ऐसा डरावना शोर, जो रात के अंधेरे में और भी भयावह लगने लगता है।

धराली
धराली

बिजली, इंटरनेट और संपर्क सब ठप

शाम ढलते ही धराली में अंधेरा गहराने लगता है।

  • मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं ठप हो जाती हैं।
  • बिजली भी अक्सर चली जाती है, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है।
  • जो जगह कभी देर रात तक जगमगाती रहती थी, वहां अब सिर्फ डर और तन्हाई का डेरा है।

धराली की रात: डर और नींद की जंग

रविवार की शाम जब हमारी टीम धराली पहुंची, तो राजेश पंवार के क्षतिग्रस्त होटल में रात बिताने का ठिकाना बना।

  • सात बजे ही सन्नाटा छा गया था।
  • सामूहिक रसोइयों में रात आठ बजे तक खाना परोसा जा चुका था।
  • नौ बजे के बाद मोबाइल सिग्नल गायब हो गया और कुछ देर में बिजली भी चली गई।
  • रातभर सिर्फ भागीरथी की गरजती आवाजें सुनाई देती रहीं, जो बार-बार नींद तोड़ती रहीं।

सुबह की हलचल और उम्मीद

सुबह सामूहिक रसोई और राहत शिविरों में हलचल शुरू हुई।

  • कोहरे की चादर में लिपटा धराली धीरे-धीरे सूरज की रोशनी से उजागर हुआ।
  • सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मलबे से रास्ता बनाने में जुट गईं।
  • बुलडोज़रों की आवाज़ों ने धराली की खामोशी को पहली बार तोड़ा।
  • स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टर मरीजों के इंतज़ार में खड़े थे।

त्रासदी की गूंज: सिसकियां और सूनी आंखें

सोमेश्वर देवता मंदिर परिसर में वो महिलाएं बैठी थीं, जिन्होंने इस सैलाब में अपने घर, होटल और सेब के बाग गंवा दिए। उनकी सिसकियां और सूनी आंखें त्रासदी का बयान कर रही थीं, लेकिन भागीरथी के शोर में वो सिसकियां भी कहीं खो रही थीं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *